क्या है “गुड” न्यूज़?


jaggery process
गुड़ — गुड़ का स्वरूप एवं गुण
(अथ गुडस्य लक्षणं गुणानाह—)
अब गुड़ के स्वरूप और उसके गुणों का वर्णन किया गया है।
इक्षो रसो यः सम्पक्वो जायते लोहवद् दृढः ॥२४॥
स गुडो गौडदेशे तु मत्स्यण्ड्येव गुडो मतः ।
गुडो वृष्यो गुरुः स्निग्धो वातघ्नो मूत्रशोधनः ।
नातिपित्तहरो मेदःकफक्रिमिबलप्रदः ॥२५॥

गन्ने का रस अच्छी तरह पकाने पर जब लोहे के समान कठोर हो जाता है, उसे गुड़ (Guḍa) कहा जाता है।
गौड़ प्रदेश में मत्स्यण्डी को ही गुड़ कहा गया है।
गुड़ वृष्य (प्रजनन शक्ति एवं जीवनशक्ति को बढ़ाने वाला), गुरु (पचने में भारी) और स्निग्ध (स्निग्ध/चिकना गुण वाला) है। यह वात दोष का शमनकरता है और मूत्र की उचित शुद्धि एवं प्रवाह में सहायक माना गया है।
यह पित्त का विशेष रूप से शमन नहीं करता। यह मेद (वसा), कफ और कृमि को बढ़ाने वाला तथा शरीर को बल प्रदान करने वाला बताया गया है।

पुराने और नए गुड़ के गुण
पुराना गुड़ — पुराण गुड़
(अथ पुराणगुडस्य गुणानाह—)
अब पुराने गुड़ के गुणों का वर्णन किया गया है।
गुडो जीर्णो लघुः पथ्योऽनभिष्यन्द्यग्निपुष्टिकृत् ।
पित्तघ्नो मधुरो वृष्यो वातघ्नोऽसृक्प्रसादनः ॥२६॥

पुराना गुड़ लघु, अर्थात् पचने में हल्का और पथ्य, अर्थात् स्वास्थ्य के लिए हितकारी होता है।
यह शरीर के सूक्ष्म मार्गों में अवरोध या अत्यधिक चिपचिपापन उत्पन्न नहीं करता (अनभिष्यन्दी)। यह पाचन शक्ति और अग्नि को मजबूत करता है।
यह पित्त और वात का शमन करता है, मधुर रस वाला, वृष्य तथा असृक्प्रसादन, अर्थात् रक्त के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल, बताया गया है।

नया गुड़ — नवीन गुड़
(अथ नवीनगुडस्य गुणानाह—)
अब नए गुड़ के गुणों का वर्णन किया गया है।
गुडो नवः कफश्वासकासकृमिकोऽग्निकृत् ॥२७॥
नया गुड़ कफ को बढ़ाने वाला है। इसके सेवन का संबंध श्वास संबंधी विकार, खाँसी और कृमि से बताया गया है। साथ ही यह अग्नि अर्थात् पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला है।

अनुपान के अनुसार गुड़ के गुण
(अथानुपानभेदेन गुडस्य गुणानाह—)
अब अलग-अलग पदार्थों के साथ सेवन करने पर गुड़ के गुणों का वर्णन किया गया है।
श्लेष्माणमाशु विनिहन्ति सदाद्रकेण
पित्तं निहन्ति च तदेव हरीतकीभिः ।
शुण्ठ्या समं हरति वातमशेषमेतं
दोषत्रयक्षयकराय नमो गुडाय ॥२८॥

गुड़ को आर्द्रक (ताजा अदरक) के साथ लेने पर कफ का शीघ्र शमन करने वाला बताया गया है।
गुड़ को हरितकी के साथ लेने पर पित्त का शमन करने वाला बताया गया है।
गुड़ को शुण्ठी (सूखी अदरक/सोंठ) के साथ लेने पर वात का शमन करने वाला बताया गया है।
इस प्रकार उचित अनुपान के साथ सेवन किया गया गुड़ वात, पित्त और कफ — तीनों दोषों के शमन में सहायक बताया गया है।

एक वर्ष से कम पुराना — नया गुड़
एक वर्ष से कम पुराना गुड़ नवीन गुड़ माना जाता है। इसे मधुर, खारा, उष्ण और पचने में भारी बताया गया है।
इसे रक्त विकार, कुष्ठादि रोग, रक्तपित्त तथा अन्य पित्त विकारों में अहितकारी माना गया है।
यह मूत्रशोधक, वृष्य और सारक है। इसके सेवन से कृमि और मेद उत्पन्न होने का वर्णन है। साथ ही यह शुक्र, मज्जा, मांस और रक्त के निर्माण में सहायक बताया गया है।
यह अग्निप्रदीपक है, लेकिन पित्त और मेद को बढ़ा सकता है। साथ ही वात, दमा, खाँसी और कफ के शमन का भी वर्णन मिलता है।
शुद्ध किया हुआ नया गुड़ — अर्थात् जिसकी मल/मलासी (molasses) निकाल दी गई हो — रक्त और कफ को बढ़ाने वाला, मधुर, स्निग्ध और वातशामक बताया गया है। यह मल-मूत्र की उचित प्रवृत्ति में भी सहायक माना गया है।

एक वर्ष पुराना गुड़
जब गुड़ एक वर्ष पुराना हो जाता है, तो वह अधिक लघु अर्थात् पचने में हल्का हो जाता है और सभी दोषों के शमन में उपयोगी माना गया है।
यह अग्निदीपक, पथ्य, हृद्य, स्वादिष्ट, पौष्टिक और रसायन बताया गया है।
यह मल-मूत्र की शुद्धि में सहायक होता है तथा पाण्डु, सूजन, मेद और श्रम के शमन में उपयोगी माना गया है।
पुराना गुड़ जीर्ण रोग, संताप, पित्त और वात के शमन में उपयोगी बताया गया है।
उचित औषधियों के साथ प्रयोग करने पर यह जीर्ण ज्वर आदि में उपयोगी बताया गया है।

तीन वर्ष पुराना गुड़
जब गुड़ तीन वर्ष पुराना हो जाता है, तो वह और अधिक लघु होकर सभी दोषों के शमन में उपयोगी माना जाता है।
पुराने गुड़ों में इसे उत्तम और श्रेष्ठ कहा गया है।
इसका उपयोग अरिष्ट आदि आयुर्वेदिक योगों में किया जाना बताया गया है।
तीन वर्ष से अधिक पुराना गुड़ हीनवीर्य अर्थात् कम प्रभावशक्ति वाला माना गया है.


gul bhat h
रेसिपी YouTube पर देखें
गुड़ चावल
सामग्री
भीगे हुए चावल – 1 कप
ताज़ा कद्दूकस किया हुआ नारियल – 1 कप
गुड़ – 1 कप
घी – 3 बड़े चम्मच
लौंग – 2–3
इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
जायफल पाउडर – ½ छोटा चम्मच
केसर – ½ छोटा चम्मच
•कटे हुए काजू और बादाम – 2 बड़े चम्मच
विधि
एक बर्तन में 2 कप पानी उबालें। उसमें गुड़, इलायची पाउडर और जायफल पाउडर डालकर गुड़ पूरी तरह घुलने तक उबाल लें।
चावल को 30 मिनट तक भिगोकर अच्छी तरह छान लें।
एक कड़ाही में घी गरम करें। उसमें लौंग डालें, फिर ताज़ा नारियल और भीगे हुए चावल डालकर अच्छी तरह भून लें। अब केसर डालकर कुछ देर और भूनें।
इसके बाद तैयार किया हुआ गरम गुड़ का पानी डालें। अच्छी तरह मिलाकर ढक्कन लगाएँ और चावल को पकने दें।
बीच-बीच में ढक्कन हटाकर चलाते रहें। जब चावल लगभग पक जाएँ, तब उसमें घी डालकर फिर से ढककर पकने दें। चावल पूरी तरह पक जाएँ तो गैस बंद कर दें और 5–10 मिनट तक ढककर रहने दें।
अंत में कटे हुए काजू और बादाम डालकर गरमागरम परोसें।

आयुर्वेदिक लाभ
गुड़ भात एक पौष्टिक, ऊर्जा देने वाला और संतोष प्रदान करने वाला पारंपरिक आयुर्वेदिक व्यंजन है।
– शरीर को शीघ्र ऊर्जा प्रदान करने में सहायक।
– गुड़ आयरन का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है, जो रक्त पोषण में सहायक हो सकता है।
– घी और ताज़ा नारियल वात दोष को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं।
– इलायची, जायफल और लौंग पाचन में सहायक माने जाते हैं।
– उचित मात्रा में सेवन करने पर शरीर को बल और संतुष्टि प्रदान करता है।
– विशेष रूप से ठंड के मौसम और त्योहारों के लिए उपयुक्त।
प्रकृति: वात ✔️ | पित्त ✔️ (संयमित मात्रा) | कफ ⚠️ (संयमित मात्रा)
कमज़ोरी दूर करने के लिए गुड़ भात लाभकारी माना जाता है। यह पौष्टिक व्यंजन मन को प्रसन्नता, शरीर को ऊर्जा और भोजन के प्रति रुचि प्रदान करता है।




कॉपीराइट © २०२६ Vedic Intelligence™ — सर्वाधिकार सुरक्षित।