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गेहूं की कहानी

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गोधूमः
(अथ गोधूमः [गेहूँ] । तस्य नामानि सलक्षणभेदानाह—)
गोधूमः सुमनोऽपि स्यात्त्रिविधः स च कीर्तितः।
महागोधूम इत्याख्यः पश्चादेशात् समागतः॥

मधूली तु ततः किञ्चिदल्पा सा मध्यदेशजा।
निःशूको दीर्घगोधूमः क्वचिन्नन्दीमुखाभिधः॥


गोधूम और सुमन गेहूँ के समानार्थी नाम हैं। गेहूँ के तीन प्रकार बताए गए हैं—
महागोधूम – पश्चिमी प्रदेश से प्राप्त होने वाला गेहूँ का प्रकार।
मधूली – आकार में थोड़ा छोटा गेहूँ का प्रकार, जो मध्यदेश (भारत के मध्यवर्ती प्रदेश) में उगाया जाता है।
नन्दीमुख – लंबे आकार का तथा जिसके दानों पर आवरण जैसे लंबे काँटे (awn) नहीं होते, ऐसा गेहूँ का प्रकार। कुछ प्रदेशों में इसे नन्दीमुखकहा जाता है।

अथ गोधूमगुणानाह—
गोधूमो मधुरः शीति वातपित्तहरो गुरुः।
कफशुक्रप्रदो बल्यः स्निग्धः सन्धानकृत्सर:
जीवनो बृंहणो वर्ण्यो रुच्यः स्थैर्यकृत्


गोधूम (गेहूँ) स्वाद में मधुर, वीर्य से शीत और वात-पित्त दोषों का शमन करने वाला है। यह गुरु (पचने में भारी) है। गेहूँ कफ दोष और शुक्र धातु को बढ़ाता है, शरीर को बल प्रदान करता है और स्निग्ध होता है। यह हड्डियों के टूटने पर उनके जुड़ने में सहायक तथा सौम्य विरेचक है। यह जीवनदायी और शरीर का पोषण करने वाला है तथा शरीर का वजन बढ़ाने, शरीर की कांति सुधारने और घावों को भरने में उपयोगी है। साथ ही यह रुचि बढ़ाता है और शरीर को स्थिरता प्रदान करता है।

अथ मधूलीनन्दीमुखयोगुणानाह—
मधूली शीतला स्निग्धा पित्तघ्नी मधुरा लघुः।
शुक्रला बृंहणी पथ्या तद्वन्नन्दीमुखः स्मृतः


मधूली वीर्य से शीत, स्निग्ध, पित्तदोष का शमन करने वाली, स्वाद में मधुर और लघु है। यह शुक्रधातु की वृद्धि करती है, शरीर का वजन बढ़ाने में सहायक है और हितकर है।
नन्दीमुख के गुणधर्म भी मधूली के समान हैं।

समानार्थी नाम (व्युत्पत्ति)
गोधूम
  – इसके बीजों पर आवरण होता है।
सुमन  – इसके गुणों के कारण इसकी प्रशंसा की जाती है।
मधूली  – स्वाद में मीठा होने के कारण इसे मधूली कहा जाता है।
नन्दीमुख  – स्वाद में मीठा होने के कारण इसे नन्दीमुख कहा जाता है।
हिंदी नाम: गेहूँ

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गेहूं की खीर
सामग्री
भीगे हुए मोटे पिसे गेहूं – १ कप
भीगी हुई चना दाल – २ बड़े चम्मच
भीगे हुए चावल – २ बड़े चम्मच
इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
बादाम की कतरन – १ बड़ा चम्मच
गुड़ पाउडर – १ कप
दूध – १ लीटर
विधि
गेहूं को रातभर भिगोकर दरदरा पीस लें। चना दाल और चावल को 1 घंटे के लिए भिगो दें। प्रेशर कुकर में दरदरा पिसा हुआ गेहूं, भीगी हुई चना दाल और भीगे हुए चावल डालें। आवश्यकतानुसार पानी डालकर 3 सीटी आने तक पकाएँ।
इस बीच, एक अलग बर्तन में दूध को उबालें और थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाएँ। फिर इसमें पका हुआ गेहूं, चना दाल और चावल का मिश्रण डालकर अच्छी तरह मिलाएँ।
अब इसमें इलायची पाउडर और कटे हुए बादाम डालें। खीर को थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाएँ। गैस बंद कर दें और खीर को गुनगुना होने दें। जब खीर गुनगुनी हो जाए, तब इसमें गुड़ का पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।
स्वादिष्ट गेहूं की खीर तैयार है। परोसने से पहले भगवान को नैवेद्य के रूप में अर्पित करें

आयुर्वेदिक लाभ
– गेहूं शरीर को शक्ति, पोषण और स्थिर ऊर्जा प्रदान करता है।
– गुड़ पाचन में सहायक है तथा रक्तवर्धक माना जाता है।
– दूध ओज बढ़ाने वाला और शरीर को पोषण देने वाला श्रेष्ठ आहार है।
– चना दाल प्रोटीन से भरपूर होकर मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
– यह खीर वात और पित्त को संतुलित करने में सहायक तथा बलवर्धक मानी जाती है।

आयुर्वेदिक सुझाव: बेहतर पाचन के लिए इस खीर का सेवन हमेशा गुनगुना और सीमित मात्रा में करें। खीर के हल्की गुनगुनी होने के बाद ही इसमें गुड़ मिलाएँ। आयुर्वेद के अनुसार ऐसा करने से गुड़ के गुण सुरक्षित रहते हैं और दूध फटने की संभावना भी कम हो जाती है।



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