इमली के बारे में जानें

अम्लिका (इमली)
अम्लिका चुक्रिकाम्ली च चुक्रा दन्तशठापि च ।
अम्ला च चिञ्चिका चिञ्चा तिन्तिडीका च तिन्तिडी ॥
अम्लिकाऽम्ला गुरुर्वातहरी पित्तकफास्रकृत् ।
पक्वा तु दीपनी रूक्षा सरोष्णा कफवातनुत् ॥
नाम / पर्याय
अम्लिका को चुक्रिका, अम्ली, चुक्रा, दन्तशठा, अम्ला, चिञ्चिका, चिञ्चा, तिन्तिडीका और तिन्तिडी आदि नामों से भी जाना जाता है।
गुणधर्म
अम्लिका खट्टी स्वाद वाली, गुरु (भारी) और वातशामक है। यह पित्त, कफ और रक्तदोष को बढ़ाती है।
पका हुआ फल दीपन (पाचनशक्ति बढ़ाने वाला), रूक्ष (रूक्षता/शुष्कता उत्पन्न करने वाला), सर (मलप्रवर्तन एवं प्रवाह को बढ़ावा देने वाला) और उष्ण (उष्ण वीर्य वाला) होता है। यह कफ और वात को शांत करता है।
पर्यायों की व्युत्पत्ति
• अम्लिका – ‘अम्ल – जो खट्टा हो; अम्लिका – जो स्वभाव से खट्टी हो; अम्ल – अपने खट्टेपन के कारण।’ इसका स्वाद खट्टा होता है।
• चुक्रिका – ‘चुक्रा – जिसके द्वारा संतुष्टि प्राप्त होती है।’ इसका पाककला में उपयोग तृप्तिदायक होता है।
• अम्ली – अम्ली – अम्लिका देखें।
• दन्तशठा – ‘दन्तशठा – जो अपने खट्टेपन के कारण दाँतों में एक विशेष प्रकार की संवेदना उत्पन्न करे।’ यह दाँतों में एक विशेष संवेदना उत्पन्न करती है।
• चिञ्चा–चिञ्चिका – ‘चिञ्चा – जो अपने खट्टेपन के कारण मुख में एक विशेष संवेदना उत्पन्न करे।’ यह मुख में एक विशेष संवेदना उत्पन्न करती है।
• तिन्तिडी–तिन्तिडीका – ‘तिन्तिडीका – जो मुख में आर्द्रता/लार उत्पन्न करे।’ यह मुख में लार उत्पन्न करती है।
गुणधर्म एवं चिकित्सीय उपयोग
चरकसंहिता में अम्लिका का उल्लेख अम्लस्कन्ध के संदर्भ में मिलता है।
फल का गूदा प्यास शांत करता है, रुचि बढ़ाता है और हल्के रेचक के रूप में कार्य करता है। बुखार में यदि कब्ज और जलन की अनुभूति हो, तो इसका शरबत दिया जाता है।
कब्ज में इसे सेना जैसे रेचक द्रव्यों के साथ भी दिया जाता है।
ताजे पत्तों का लेप सूजन और फोड़े पर तथा दर्द कम करने के लिए लगाया जाता है। फूलों का लेप नेत्रों के कंजंक्टाइवा (श्लेष्मल झिल्ली) के सूजनयुक्त विकारों में लगाया जाता है।
कठोर बाहरी छिलके की राख का उपयोग अजीर्ण और अपच में किया जाता है तथा यह मूत्रल (पेशाब की मात्रा बढ़ाने वाली) के रूप में भी उपयोगी मानी जाती है।

पंचामृत – १
सामग्री
हल्की हरी मिर्च – २
करी पत्ता – ८-१० पत्ते
हींग – १/२ चम्मच
नमक – १ चम्मच
मेथी दाना – १/२ चम्मच
हल्दी – १/२ चम्मच
गुड़ – १ चम्मच
इमली – २ चम्मच
तेल – २ चम्मच
नारियल पानी – १/२ कप
नारियल का दूध – १ कप
विधि
एक बर्तन में तेल गरम करें। गरम होने पर उसमें हरी मिर्च और हींग डालें। इस बीच, (एक बूंद तेल में भूने) मेथी के बीज और हल्दी को नारियल पानी में मिलाकर तैयार कर लें। मिर्च भून जाने पर उसमें करी पत्ता डालकर थोड़ा भूनें।
अब इसमें नारियल पानी डालें। उबाल आने पर इमली, गुड़ और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। दोबारा उबाल आने पर नारियल का दूध डालें और अच्छी तरह मिला लें। ढक्कन लगाकर पकने दें।
लगभग २ मिनट बाद ढक्कन हटाकर हल्का सा चलाएँ, गैस बंद कर दें और फिर से ढक्कन लगाकर २ मिनट के लिए ढका रहने दें।
स्वादिष्ट पंचामृत तैयार है।
पंचामृत – २
सामग्री
तेल – २ चम्मच
हल्की हरी मिर्च – २
हींग – १/२ चम्मच
करी पत्ता – ८-१० पत्ते
मेथी दाना – १/२ चम्मच
हल्दी – १/२ चम्मच
तिल – १ चम्मच
धनिया के बीज – १ चम्मच
इलायची – २
लौंग – ३-४
नारियल (कद्दूकस किया हुआ) – १/२ कप
हरा धनिया – २ चम्मच
नमक – १ चम्मच
गुड़ – २ चम्मच
इमली का गाढ़ा पानी (पल्प) – १ कप
विधि
सबसे पहले तवे पर तिल, धनिया के बीज, इलायची और लौंग को अच्छी तरह भून लें। फिर इसमें नारियल और हरा धनिया डालकर थोड़ा और भूनें। गैस बंद करके थोड़ा सा तेल डालें और अच्छी तरह मिला लें। मिश्रण ठंडा होने पर इसे मिक्सर में बारीक पीस लें।
अब एक पैन में तेल गरम करें। गरम होने पर उसमें हरी मिर्च, हींग, करी पत्ता, मेथी दाना और हल्दी डालकर अच्छी तरह भून लें। इसके बाद इमली का पल्प, गुड़ और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। फिर तैयार किया हुआ मसाला डालकर लगातार चलाते हुए उबाल आने दें। जब मिश्रण थोड़ा गाढ़ा हो जाए, तब गैस बंद कर दें.
स्वादिष्ट पंचामृत तैयार है।
यह पंचामृत स्वादिष्ट और रुचिकर है तथा इसे चटनी की तरह वड़े या भजियों के साथ खाया जा सकता है।
आयुर्वेदिक लाभ
– शरीर को पोषण और बल प्रदान करता है – नारियल का दूध और नारियल पानी शरीर के ऊतकों के पोषण में सहायक होते हैं।
– पाचन शक्ति को बढ़ावा देता है – मेथी, हींग और करी पत्ता अग्नि को प्रबल कर गैस और अपच को कम करने में सहायक हैं।
– दोषों के संतुलन में सहायक – मधुर, अम्ल और हल्के कटु रस का संयोजन दोष संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
– चयापचय और शुद्धि में सहायक – इमली और मसाले पाचन तथा आम के निष्कासन में सहायक होते हैं।
– ऊर्जा और ओज बढ़ाने में सहायक – गुड़ और नारियल प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान कर शरीर में स्फूर्ति लाते हैं।
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